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जेटली के बजट से नाखुश किसान,विरोध प्रदर्शन की तैयारी


नई दिल्ली। केंद्र सरकार अपने बजट को गांव का बजट बताकर भले ही अपी पीठ थपथपाने का काम कर रही हो। लेकिन हकीकत में जेटली के पिटारे से निकले एलान किसानो को रास नहीं आ रहे है। फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य संबंधी घोषणा किसान संगठनों को दूर की कौड़ी साबित हो रही है। एमएसपी के गलत आकलन से नाराज किसान संगठनों ने सरकार को चेताने के लिए अब सात फरवरी से देशव्यापी प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
भारतीय मजदूर किसान संघ समेत कई किसान संगठनों का आरोप है की केंद्र सरकार ने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को सामने रख कर किसानों को लुभाने के लिए उनकी आमदनी बढ़ाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागत से डेढ़ गुना करने की बात तो की है, लेकिन ये चुनावी घोषणा है।
किसान संगठनों के मुताबिक सरकार का खेती की लागत तय करने का तरीका गलत है क्योंकि वह किसान यानी परिवार के मुखिया को छोड़ कर उसके परिवार को अकुशल मजदूर मानती है, जबकि किसान का पूरा परिवार खेती करता है. इसलिए पूरे परिवार को स्किल्ड यानी कुशल मजदूर माना जाए। खेती की लागत तय करते वक्त जमीन का किराया भी जोड़ा जाए क्योंकि किसानों का एक बड़ा वर्ग खेत किराए पर ले कर खेती करता है। सरकार किसानों को सब्सिडी के नाम पर कुछ रियायतें तो देती है लेकिन खेती की लागत तय करते समय सब्सिडी घटा देती है। किसान संगठन चाहते हैं की सरकार एमएसपी तय करते समय सब्सिडी को लागत से ना घटाए।

04 February, 2018
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