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हनूुमानजी के वो नाम जिनके जप करते ही निर्विध्न संपन्न होते है हर काम


11 अप्रैल 2017 को हनुमान जयंती है। इस बार हनुमानजी अपने प्रिय वार मंगलवार को प्रकट हो रहे हैं। ज्योतिष अशोक शास्त्री के मुताबिक इस साल हनुमान जयंती के अवसर पर जिन विशेष योगों का निर्माण हुआ है वह करीब 120 साल बाद आ रहा हैं। यही नहीं मंगलवार के साथ पूर्णिमा तिथि और चित्रा नक्षत्र का शुभ समयोग वैसा ही है, जब हनुमान जी इस धरा पर प्रकट हुए थे। ये विशेष योग श्रद्धालुओं को भक्ति का पूर्ण फल देगा साथ ही शनि देव के प्रकोप को भी शांत करेगा।
हनुमान जी के अनेक नाम है और वह बहुत पवित्र और सौभाग्यशाली हैं। इनमें से किसी भी नाम से किया गया पूजन बजरंगबली को प्रसन्न कर सकता है। शास्त्रों में दिए गये इन नामों के पीछे किसी कथा का उल्लेख अवश्य है इनमें से 12 सबसे ज्यादा प्रचलित नाम है। मान्यता है कि हर नाम में इतनी शक्ति है वह भक्तों के जीवन में आने वाले संकट को टाल सकता है।
जानिए उन 12 नामों के बारे में जिनका जप करने पर आपके काम निर्विध्न पूरे होंगे और आप पर आने वाली बलाएं भी दूर होंगी।बजरंगबली- यह सबसे ज्यादा प्रसिद्ध नाम है यह नाम उन्हें इसलिए दिया गया, क्योंकि इंद्र ने क्रोधित होकर उनकी ठोड़ी यानी हनु पर वज्र से प्रहार कर दिया था। इस कारण उंहें हनुमान नाम से संबोधित किया जाता है।
लक्ष्मण प्राणदाता- हनुमान जी ने भगवान राम और लक्ष्मण की सेवा की थी। जब रावण के बेटे इंद्रजीत ने लक्ष्मण पर शक्ति का प्रहार कर दिया था तो वह मूर्छित हो गए थे। तब हनुमान जी संजीवनी बूटी ले कर आए और लक्ष्मण के प्राणों पर आया संकट टाल दिया। इसलिए हनुमान को लक्ष्मण प्राण दाता कहा जाता है।
दशग्रीवदर्पहा- आप जानते होंगे की दशग्रीव यानी 10 गर्दनों वाला रावण का हनुमान जी ने घमंड चकनाचूर किया था। वह श्रीराम का संदेश लेकर लंका गए और यहां उन्होंने रावण का घमंड तोड़ा था।
रामेष्ट- हनुमान जी भगवान राम के अति प्रिय है, इसलिए उंहें रामेष्ट भी कहा जाता है।
फाल्गुन सखा- हनुमान जी का उल्लेख सिर्फ रामायण में नहीं बल्कि महाभारत में भी आता है। महाभारत के युद्ध में वह सदैव अर्जुन के रथ पर विराजमान रहे। अर्जुन का एक नाम फाल्गुन है। हनुमान जी को फाल्गुन सखा भी कहा जाता है।
पिंगाक्ष- इस शब्द का अर्थ है जिसकी आंखों का रंग भूरा हो, हनुमान जी की आंखों का रंग भूरा था, इसलिए उन्हें पिंगाक्ष भी कहा जाता है।
अमितविक्रम- इस नाम का मतलब है अत्यधिक पराक्रम वाला, अत्याधिक साहस और पराक्रम के कारण हनुमानजी को अमित विक्रम कहा जाता है।
उदधिक्रमण- इस नाम का अर्थ है जो समुद्र को भी पार कर जाता है। हनुमान जी जितने कुशल योद्धा थे उतने ही विवेकमान भी थे उन्होंने समुंद्र पार किया इसलिए उन्हें उदधिक्रमणा कहा जाता है।
अंजनीसूनू- हनुमान जी अजनि के पुत्र है, इसलिए उन्हें अंजनीसूनू कहा जाता है।
वायुपुत्र- हनुमान जी पवन देव के पुत्र माने जाते हैं। इनके स्मरण से हनुमानजी शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों के संकट दूर करते हैं, इसलिए उन्हें वायुपुत्र भी कहा जाता है।
महाबल- हनुमान जी में बल है इसलिए उन्हें महाबल कहा जाता है।
सीता शोक विनाशन- जब रावण ने देवी सीता का हरण की कर लिया था तो उनके दुख की कोई सीमा नहीं रही। उनकी तलाश में श्री राम भी वन वन भटके। हनुमान जी ही ऐसे दूत थे, जो सीता और श्रीराम के लिए शुभ समाचार लेकर आए इसलिए उन्हें सीता शोक विनाशन कहा जाता है।

10 April, 2017
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