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ग्वालियर

कुपोषण पर बवाल, इलाज नहीं देेने पर एनएलएम, आँगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आशा कार्यकर्ता होंगे पदमुक्त


श्योपुर। कुपोष के बढ़े मामलों पर अब शासन कुपोषण के मामलों को गंभीरता नहीं लेने वालों के खिलाफ सख्ती के मूड में आ गये है। श्योपुर में कुपोषण से मौत की खबरों के बाद श्योपुर के कराहल में मौके पर पहुंची प्रमुख सचिव स्वास्थ्य गौरी सिंह ने चेतावनी दी कि गाँव में कुपोषण से मौत होने तथा उचित उपचार मुहैया नहीं करवाने की स्थिति में संबंधित एनएलएम, आँगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आशा कार्यकर्ता को पदमुक्त करने की कार्यवाही की जायेगी। प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास जे.एन. कंसोटिया ने निर्देश दिये कि अस्पताल में रिक्त हॉल और कमरों को एनआरसी के लिये इस्तेमाल किया जाये। वर्तमान में 20 बेड की एनआरसी को 60 बेड की जाये। उन्होंने इस व्यवस्था को कल से ही शुरू करने के निर्देश दिये।
हालांकि राज्य शासन ने दावा किया है कि ग्राम खोरी में कुपोषण के कारण कोई मौत नहीं हुई है। प्रमुख सचिवों ने ग्राम कलमी सहराना का भ्रमण कर चौपाल आयोजित की। सरपंच रामदयाल आदिवासी ने कुपोषण से हुई मौत के संबंध में प्रचारित नामों की जानकारी के बारे में बताया कि जिनके बच्चों की मौत होना दर्शायी गयी है, उनमें मोहर सिंह एवं बृजेश आदिवासी हैं और इस गाँव में रहते ही नहीं हैं। इसी प्रकार लालू आदिवासी के बच्चे की मौत होना बताया गया है, जिसके बच्चे ही नहीं हैं। पप्पू आदिवासी के यहाँ भी किसी बच्चे की मौत नहीं हुई।
हालांकि प्रमुख सचिवों की टीम ने अधिकारी निर्देश दिये कि कुपोषण के संबंध में महिला-बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग की 11 संयुक्त टीम गाँव-गाँव एवं डोर-टू-डोर जाकर सर्वें करेंगी। कुपोषित तथा कम वजन के बच्चों, बीमारियों से पीड़ित बच्चों को चिन्हित कर 4 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। इसके अतिरिक्त एनआरसी कराहल में प्रत्येक बुधवार को श्योपुर से शिशु रोग एवं बाल रोग विशेषज्ञ द्वारा बच्चों का उपचार कर एनआरसी स्टॉफ को दिशा-निर्देश दिये जायेंगे।

12 September, 2016
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